श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.12.33 
केन दु:खेन संतप्ता रोदिषि त्वं वरानने।
ब्राह्मणं तं ततो दृष्ट्वा सा स्त्री करुणमब्रवीत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
"सुमुखी! ऐसा कौन सा दुःख है जो तुम्हें रुला रहा है?" ब्राह्मण को देखकर स्त्री ने दुःखी स्वर में कहा।
 
"Sumukhi! What sorrow is it that has made you cry?" the woman spoke in a sad voice upon seeing the Brahmin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)