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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान
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श्लोक 3
श्लोक
13.12.3
पुरा भंगास्वनो नाम राजर्षिरतिधार्मिक:।
अपुत्र: पुरुषव्याघ्र पुत्रार्थं यज्ञमाहरत्॥ ३॥
अनुवाद
पुरुषसिंह! पूर्वकाल में भंगास्वन नामक एक अत्यन्त धार्मिक ऋषि पुत्रहीन होने के कारण पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करते थे॥3॥
Purusha Singh! Earlier, a very religious sage named Bhangaswan, being sonless, used to perform a yagya to get a son. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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