श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.12.28 
ततो ब्राह्मणरूपेण देवराज: शतक्रतु:।
भेदयामास तान् गत्वा नगरं वै नृपात्मजान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान इंद्र ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उस नगर में जाकर राजकुमारों में फूट डाल दी।
 
Then Lord Indra, taking the form of a Brahmin, went to that city and caused a rift amongst the princes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)