श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  13.12.17-18h 
पुत्रा दाराश्च भृत्याश्च पौरजानपदाश्च ते॥ १७॥
किंत्विदं त्विति विज्ञाय विस्मयं परमं गता:।
 
 
अनुवाद
राजा के पुत्र, पत्नियाँ, सेवक और नगर तथा क्षेत्र के लोग आश्चर्यचकित होकर पूछने लगे, ‘क्या हुआ है?’ 17 1/2
 
The king's sons, wives, servants and the people of the city and the region were astonished, asking, 'What has happened?' 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)