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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान
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श्लोक 14
श्लोक
13.12.14
मृदुत्वं च तनुत्वं च विक्लवत्वं तथैव च।
स्त्रीगुणा ऋषिभि: प्रोक्ता धर्मतत्त्वार्थदर्शिभि:॥ १४॥
अनुवाद
‘धर्म के तत्त्व को देखने और जानने वाले ऋषियों ने स्त्री के गुण कोमलता, दुर्बलता और चंचलता बताए हैं ॥14॥
‘The sages who have seen and know the essence of religion have described the qualities of a woman as softness, weakness and restlessness. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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