Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.119.d2-17: जो शरीर मृत्यु के बाद चिता पर जलाकर भस्म हो जाता है, या मांसाहारी जीव के मल में बदल जाता है, या फेंक दिया जाता है और उसमें कीड़े पड़ जाते हैं - इन तीन में से एक फल तो निश्चित है, ऐसे शरीर का पालन-पोषण विद्वान पुरुष कैसे कर सकता है? विद्वान पुरुष दूसरों को कष्ट देकर अपने शरीर का पालन-पोषण उसके मांस से कैसे कर सकता है? मांस की प्रशंसा करने से भी पाप कर्मों का फल मिलता है?॥17॥ | mahabharat अध्याय 13.119: हिंसा और मांसभक्षणकी घोर निन्दा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(भस्म विष्ठा कृमिर्वापि निष्ठा यस्येदृशी ध्रुवा।
स काय: परपीडाभि: कथं धार्यो विपश्चिता॥ )
प्रशंसा ह्येव मांसस्य दोषकर्मफलान्विता॥ १७॥
अनुवाद
जो शरीर मृत्यु के बाद चिता पर जलाकर भस्म हो जाता है, या मांसाहारी जीव के मल में बदल जाता है, या फेंक दिया जाता है और उसमें कीड़े पड़ जाते हैं - इन तीन में से एक फल तो निश्चित है, ऐसे शरीर का पालन-पोषण विद्वान पुरुष कैसे कर सकता है? विद्वान पुरुष दूसरों को कष्ट देकर अपने शरीर का पालन-पोषण उसके मांस से कैसे कर सकता है? मांस की प्रशंसा करने से भी पाप कर्मों का फल मिलता है?॥17॥
How can a learned man nourish a body which after death is reduced to ashes by being burned on a pyre, or is converted into the feces of a carnivorous creature by being eaten, or is thrown away and is infested with worms - one of these three results is certain for it. How can a learned man nourish his body with its flesh by tormenting others? Praising flesh also connects one with the results of sinful actions?॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥