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भेरीमृदंगशब्दांश्च तन्त्रीशब्दांश्च पुष्कलान्।
निषेविष्यन्ति वै मन्दा मांसभक्षा: कथं नरा:॥ १५॥
अनुवाद
मूर्ख मांसाहारी मनुष्य भेरी, मृदंग और वीणा की दिव्य मधुर ध्वनि का आनन्द कैसे ले सकेंगे, जो स्वर्ग में पूर्ण रूप से उपलब्ध है; क्योंकि वे स्वर्ग में जा ही नहीं सकते।
How will the foolish meat-eating men be able to enjoy the divinely sweet sounds of the Bheri, Mridanga and Veena, which are available in full availability in heaven; because they cannot go to heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥