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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 118: बृहस्पतिजीका युधिष्ठिरको अहिंसा एवं धर्मकी महिमा बताकर स्वर्गलोकको प्रस्थान
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श्लोक 5
श्लोक
13.118.5
अहिंसकानि भूतानि दण्डेन विनिहन्ति य:।
आत्मन: सुखमन्विच्छन् स प्रेत्य न सुखी भवेत्॥ ५॥
अनुवाद
जो मनुष्य अपना सुख चाहने के लिए अहिंसक प्राणियों को डंडे से पीटता है, वह परलोक में सुखी नहीं होता ॥5॥
A person who, seeking his own happiness, beats non-violent creatures with a stick, is not happy in the next world. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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