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mahabharat 13.118.1: युधिष्ठिर ने पूछा - भगवन्! अहिंसा, वैदिक कर्म, ध्यान, इन्द्रिय संयम, तप और गुरुभक्ति - इनमें से कौन-सा कर्म मनुष्य का विशेष कल्याण करने वाला है?   |   mahabharat अध्याय 13.118: बृहस्पतिजीका युधिष्ठिरको अहिंसा एवं धर्मकी महिमा बताकर स्वर्गलोकको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.118.1 
युधिष्ठिर उवाच
अहिंसा वैदिकं कर्म ध्यानमिन्द्रियसंयम:।
तपोऽथ गुरुशुश्रूषा किं श्रेय: पुरुषं प्रति॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - भगवन्! अहिंसा, वैदिक कर्म, ध्यान, इन्द्रिय संयम, तप और गुरुभक्ति - इनमें से कौन-सा कर्म मनुष्य का विशेष कल्याण करने वाला है?
 
Yudhishthir asked – Lord! Non-violence, Vedic actions, meditation, control of senses, penance and devotion to Guru - which of these actions can bring special welfare to man?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)