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mahabharat 13.117.6: राजा! यदि कोई पापी व्यक्ति धर्म को जानने वाले ब्राह्मण से अपना पाप कह दे, तो वह उस पाप से होने वाली निंदा से शीघ्र ही छुटकारा पा लेता है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.117: पापसे छूटनेके उपाय तथा अन्नदानकी विशेष महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 117: पापसे छूटनेके उपाय तथा अन्नदानकी विशेष महिमा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.117.6 
यदि व्याहरते राजन् विप्राणां धर्मवादिनाम्।
ततोऽधर्मकृतात् क्षिप्रमपवादात् प्रमुच्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजा! यदि कोई पापी व्यक्ति धर्म को जानने वाले ब्राह्मण से अपना पाप कह दे, तो वह उस पाप से होने वाली निंदा से शीघ्र ही छुटकारा पा लेता है॥6॥
 
King! If a sinner tells his sin to a Brahmin who is well versed with Dharma, then he soon gets rid of the condemnation caused by that sin. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)