Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.117.19: जो वैश्य अन्न पैदा करके उसका छठा भाग राजा को देता है और शेष शुद्ध अन्न ब्राह्मण को दान करता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है॥19॥ | mahabharat अध्याय 13.117: पापसे छूटनेके उपाय तथा अन्नदानकी विशेष महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
षड्भागपरिशुद्धं च कृषेर्भागमुपार्जितम्।
वैश्यो ददद् द्विजातिभ्य: पापेभ्य: परिमुच्यते॥ १९॥
अनुवाद
जो वैश्य अन्न पैदा करके उसका छठा भाग राजा को देता है और शेष शुद्ध अन्न ब्राह्मण को दान करता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है॥19॥
A Vaishya who produces food grains, gives one-sixth of it to the king, and donates the remaining pure grain to a Brahmin, becomes free from all sins.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥