श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  13.116.99 
दधि हृत्वा बकश्चापि प्लवो मत्स्यानसंस्कृतान्।
चोरयित्वा तु दुर्बुद्धिर्मधु दंश: प्रजायते॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
दही चुराने से मूर्ख बगुला बनता है। कच्ची मछली चुराने से करंडव नामक जलपक्षी बनता है। और शहद का अपहरण करने से मच्छर बनता है।
 
By stealing curd, a fool becomes a heron. By stealing raw fish, he becomes a water bird called Karandava. And by kidnapping honey, he is born as a mosquito.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)