श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  13.116.92 
कृतघ्नस्तु मृतो राजन् यमस्य विषयं गत:।
यमस्य पुरुषै: क्रुद्धैर्वधं प्राप्नोति दारुणम्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
राजा! कृतघ्न मनुष्य मरने के बाद यमराज के लोक में जाता है। वहाँ यमराज के क्रोधित दूत उस पर निर्दयतापूर्वक आक्रमण करते हैं॥92॥
 
King! An ungrateful man after death goes to the world of Yamraj. There the enraged messengers of Yamraj attack him mercilessly.॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)