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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 77
श्लोक
13.116.77
सखिभार्यां गुरोर्भार्यां राजभार्यां तथैव च।
प्रधर्षयित्वा कामाय मृतो जायति सूकर:॥ ७७॥
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए मित्र, गुरु या राजा की पत्नी का सतीत्व भंग करता है, वह मरने के बाद सूअर बनता है। 77.
He who, for the fulfillment of his desires, violates the chastity of the wife of a friend, teacher or king, becomes a pig after his death. 77.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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