श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  13.116.73 
तत: प्रेत्य महाराज मृतो जायति सूकर:।
सूकरो जातमात्रस्तु रोगेण म्रियते नृप॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
राजा! फिर वह चूहा मरकर सूअर बनता है। हे मनुष्यों के स्वामी! वह सूअर जन्म लेते ही रोग से मर जाता है। 73.
 
King! Then that mouse becomes a pig after death. O Lord of men! That pig dies of disease as soon as it is born. 73.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)