श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  13.116.70 
छागस्तु निधनं प्राप्य पूर्णे संवत्सरे तत:।
कीट: संजायते जन्तुस्ततो जायति मानुष:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
बकरा मरने के एक वर्ष बाद कीड़ा बनता है, तत्पश्चात् वह प्राणी मनुष्य योनि में जन्म लेता है ॥70॥
 
A goat becomes a worm after one full year of death. After that that creature takes birth as a human being. 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)