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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 69
श्लोक
13.116.69
भूत्वा मीनोऽष्ट वर्षाणि मृतो जायति भारत।
मृगस्तु चतुरो मासांस्ततश्छाग: प्रजायते॥ ६९॥
अनुवाद
हे भारत! आठ वर्ष तक मछली बनकर मरने के बाद वह चार महीने तक मृग बनता है। तत्पश्चात् वह बकरी की योनि में जन्म लेता है। 69.
Bharat! After dying after living as a fish for eight years, he becomes a deer for four months. After that he is born in the womb of a goat. 69.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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