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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 62
श्लोक
13.116.62
मातापितरावाक्रुश्य सारिक: सम्प्रजायते।
ताडयित्वा तु तावेव जायते कच्छपो नृप॥ ६२॥
अनुवाद
माता-पिता की निन्दा या गाली देने से मनुष्य अगले जन्म में मैना बनता है। हे मनुष्यों के स्वामी! जो अपने माता-पिता को मारता है, वह कछुआ बनता है। 62.
By criticising or abusing one's parents, one becomes a myna in the next birth. O Lord of men! One who kills his parents becomes a tortoise. 62.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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