श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  13.116.61 
खरो जीवति मासांस्तु दश श्वा च चतुर्दश।
बिडाल: सप्तमासांस्तु ततो जायति मानव:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
वह दस महीने गधे के गर्भ में रहता है, उसके बाद चौदह महीने कुत्ते के रूप में, सात महीने बिल्ली के रूप में रहता है और अंत में मनुष्य योनि में जन्म लेता है।
 
He lives in the womb of a donkey for ten months. After that he lives as a dog for fourteen months and as a cat for seven months and finally takes birth as a human being. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)