श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.116.60 
पुत्रस्य मातापितरौ यस्य रुष्टावुभावपि।
गुर्वपध्यानत: सोऽपि मृतो जायति गर्दभ:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
जिस पुत्र पर माता और पिता दोनों ही क्रोधित होते हैं, वह गुरुजनों के कुविचारों के कारण मरने के बाद गधा होता है ॥60॥
 
The son on whom both mother and father are angry becomes a donkey after death due to the evil thoughts of his teachers. 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)