श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.116.59 
गर्दभत्वं तु सम्प्राप्य दश वर्षाणि जीवति।
संवत्सरं तु कुम्भीरस्ततो जायेत मानव:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
गधे का शरीर पाकर वह दस वर्ष तक जीवित रहता है, फिर एक वर्ष मगरमच्छ का शरीर पाकर मनुष्य योनि में जन्म लेता है।
 
After getting the body of a donkey, he lives for ten years. Then after living as a crocodile for one year, he is born as a human. 59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)