श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  13.116.58 
पितरं मातरं चैव यस्तु पुत्रोऽवमन्यते।
सोऽपि राजन् मृतो जन्तु: पूर्वं जायेत गर्दभ:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो पुत्र अपने माता-पिता का अनादर करता है, वह भी मरने के बाद सबसे पहले गधा कहलाएगा। 58॥
 
Rajan! The son who disrespects his parents will also be the first creature called a donkey after his death. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)