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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 47
श्लोक
13.116.47
खरो जीवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत।
खरो मृतो बलीवर्द: सप्त वर्षाणि जीवति॥ ४७॥
अनुवाद
भरत! वह पंद्रह वर्ष तक गधे के गर्भ में रहता है। उसके बाद वह मर जाता है और बैल बन जाता है। वह उस गर्भ में सात वर्ष तक रहता है। 47.
Bharat! He lives in the womb of a donkey for fifteen years. After that he dies and becomes a bull. He lives in that womb for seven years. 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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