श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.116.46 
अधीत्य चतुरो वेदान् द्विजो मोहसमन्वित:।
पतितात् प्रतिगृह्याथ खरयोनौ प्रजायते॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण चारों वेदों का अध्ययन करके भी लोभ के कारण पतित मनुष्यों से दान ग्रहण करता है, वह गधे की योनि में जन्म लेता है ॥46॥
 
A Brahmin who, despite having studied the four Vedas, accepts gifts from fallen men out of greed, is born in the womb of a donkey. ॥46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)