श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  13.116.43 
इह स्थानानि पुण्यानि देवतुल्यानि भूपते।
तिर्यग्योन्यतिरिक्तानि गतिमन्ति च सर्वश:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
भूपाल! इस यमलोक में देवलोक के समान पवित्र स्थान हैं, जिनमें मर्त्य प्राणियों (कीट-पतंगे आदि) को छोड़कर सभी पुण्यात्मा प्राणी जाते हैं॥43॥
 
Bhupal! In this Yamalok, there are holy places similar to Devlok, in which all the virtuous living beings, except the mortal creatures (insects, moths etc.) go. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)