श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  13.116.41 
कर्मणा येन येनेह यस्यां योनौ प्रजायते।
जीवो मोहसमायुक्तस्तन्मे निगदत: शृणु॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हें बताता हूँ कि जीव आसक्ति के वश होकर कुछ कर्म करके कितने प्रकार के जन्म लेता है। सुनो॥41॥
 
I am telling you the different kinds of births a living being takes after performing certain deeds under the influence of attachment. Listen. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)