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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 40
श्लोक
13.116.40
अधर्मेण समायुक्तो यमस्य विषयं गत:।
महद् दु:खं समासाद्य तिर्यग्योनौ प्रजायते॥ ४०॥
अनुवाद
अधर्मी मनुष्य यमलोक में जाता है और वहाँ महान दुःख भोगकर पशु या पक्षी के रूप में जन्म लेता है ॥40॥
An unrighteous man goes to Yamaloka and after suffering great misery there, he is born as an animal or a bird. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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