श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.116.4 
भीष्म उवाच
अयमायाति भगवान‍् बृहस्पतिरुदारधी:।
पृच्छैनं सुमहाभागमेतद् गुह्यं सनातनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी ने कहा - वत्स! ये उदारचित्त भगवान बृहस्पतिजी यहाँ आ रहे हैं। इस महाभाग से यह सनातन रहस्यमय विषय पूछो॥4॥
 
Bhishmaji said – Vatsa! This generous minded Lord Brihaspatiji is coming here. Ask this eternal mysterious subject from this Mahabhaga. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)