श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.116.35 
बृहस्पतिरुवाच
जीव: कर्मसमायुक्त: शीघ्रं रेतस्त्वमागत:।
स्त्रीणां पुष्पं समासाद्य सूते कालेन भारत॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पति बोले, 'भारत! यह जीवात्मा अपने कर्मों से प्रेरित होकर शीघ्र ही वीर्यवान अवस्था को प्राप्त होकर स्त्री के रजस्वला रक्त में प्रविष्ट होकर समयानुसार जन्म लेता है।
 
Brihaspati said, 'Bharat! The soul, inspired by its deeds, soon attains the state of semen and enters the menstrual blood of a woman and takes birth according to the time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)