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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 31
श्लोक
13.116.31
युधिष्ठिर उवाच
आख्यातं मे भगवता गर्भ: संजायते यथा।
यथा जातस्तु पुरुष: प्रपद्यति तदुच्यताम्॥ ३१॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे भगवन्! आपने मुझे गर्भ की उत्पत्ति का ढंग बताया है। अब आप मुझे यह बताइए कि उससे उत्पन्न हुआ मनुष्य पुनः किस प्रकार बंधता है॥31॥
Yudhishthira said - O Lord! You have told me the manner in which a foetus is born. Now tell me how a man born from it again gets bound.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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