श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.116.26 
ततो धर्मसमायुक्त: स जीव: सुखमेधते।
इहलोके परे चैव किं भूय: कथयामि ते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह पुण्यात्मा इस लोक और परलोक में सुख भोगता है। मैं तुमसे और क्या कहूँ?॥26॥
 
Thereafter that righteous soul experiences happiness in this world and the next. What more shall I tell you?॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)