श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  13.116.23-24h 
त्वगस्थिमांसं शुक्रं च शोणितं च महामते॥ २३॥
शरीरं वर्जयन्त्येते जीवितेन विवर्जितम्।
 
 
अनुवाद
महामते! त्वचा, अस्थि, मांस, शुक्र और शोणित- ये सभी धातुएँ प्राणहीन शरीर को त्याग देती हैं, अर्थात् देहधारी आत्मा को छोड़ देती हैं, केवल एक ही धर्म उसके साथ जाता है। 23 1/2॥
 
Mahamate! Skin, bones, flesh, Venus and Shonit - all these metals abandon the lifeless body, that is, they leave the embodied soul, only one religion goes with it. 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)