श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  13.116.22-23h 
प्राणिनामिह सर्वेषां साक्षिभूता निशानिशम्॥ २२॥
एतैश्च सह धर्मोऽपि तं जीवमनुगच्छति।
 
 
अनुवाद
दिन और रात भी इस संसार में सभी जीवों के कर्मों के साक्षी हैं। इन सबके साथ-साथ धर्म भी जीव का अनुसरण करता है। ॥22 1/2॥
 
Day and night are also witnesses to the deeds of all living beings in this world. Along with all these, Dharma also follows the living being. ॥ 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)