श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  13.116.21-22h 
बृहस्पतिरुवाच
पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिर्मनोऽन्तक:॥ २१॥
बुद्धिरात्मा च सहिता धर्मं पश्यन्ति नित्यदा।
 
 
अनुवाद
बृहस्पति बोले- हे धर्मराज! पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, यम, बुद्धि और आत्मा- ये सब मिलकर मनुष्य के धर्म पर सदैव दृष्टि रखते हैं।
 
Brihaspati said- O Dharamraj! Earth, water, fire, air, sky, mind, Yama, intellect and soul - all of them together always keep an eye on the Dharma of man. 21 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)