श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  13.116.20-21h 
मृतं शरीरं हि नृणां सूक्ष्ममव्यक्ततां गतम्॥ २०॥
अचक्षुर्विषयं प्राप्तं कथं धर्मोऽनुगच्छति।
 
 
अनुवाद
मृत्यु के पश्चात् मनुष्य का स्थूल शरीर यहीं रह जाता है और सूक्ष्म शरीर अदृश्य हो जाता है - आँखों की पहुँच से परे। ऐसी स्थिति में धर्म उसका अनुसरण कैसे करता है?॥20 1/2॥
 
After death, the gross body of a man remains here and his subtle body attains the state of being invisible - beyond the reach of the eyes. In such a condition, how does Dharma follow him?॥20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)