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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 2
श्लोक
13.116.2
केन वृत्तेन राजेन्द्र वर्तमाना नरा भुवि।
प्राप्नुवन्त्युत्तमं स्वर्गं कथं च नरकं नृप॥ २॥
अनुवाद
राजेन्द्र! पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्य किस आचरण से उत्तम स्वर्ग को प्राप्त होते हैं? और हे मनुष्यों के स्वामी! किस आचरण से वे नरक में गिरते हैं?॥2॥
Rajendra! By what conduct do the men living on earth attain the best heaven? And O Lord of men! By what conduct do they fall into hell?॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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