श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  13.116.19-20h 
युधिष्ठिर उवाच
श्रुतं भगवतो वाक्यं धर्मयुक्तं परं हितम्॥ १९॥
शरीरनिचयं ज्ञातुं बुद्धिस्तु मम जायते।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - प्रभु ! आपके मुख से मैंने धर्म के आधार पर बहुत ही हितकारी वचन सुने । अब मैं शरीर की स्थिति जानने का विचार कर रहा हूँ । 19 1/2॥
 
Yudhishthir asked – Lord! From your mouth I heard very beneficial words based on religion. Now I am thinking of knowing the condition of the body. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)