श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  13.116.18-19h 
धर्मश्चार्थश्च कामश्च त्रितयं जीविते फलम्॥ १८॥
एतत् त्रयमवाप्तव्यमधर्मपरिवर्जितम्।
 
 
अनुवाद
धर्म, अर्थ और काम ये तीन फल हैं। अतः मनुष्य को अधर्म का त्याग करके इन तीनों को प्राप्त करना चाहिए। ॥18 1/2॥
 
Dharma (righteousness), Artha (wealth) and Kama (desire) are the three fruits of life. Therefore, a man must achieve these three by abandoning Adharma (unrighteousness). ॥18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)