vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
»
श्लोक 16-17h
श्लोक
13.116.16-17h
तस्मान्न्यायागतैरर्थैर्धर्मं सेवेत पण्डित:॥ १६॥
धर्म एको मनुष्याणां सहाय: पारलौकिक:।
अनुवाद
अतः विद्वान पुरुष को चाहिए कि न्यायपूर्वक प्राप्त धन से धर्म-कर्म का पालन करे। धर्म ही मनुष्य को परलोक में कल्याण करता है।
Therefore, a learned man should perform religious duties with the wealth obtained through justice. Dharma alone helps man in the next world. 16 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×