श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  13.116.15-16h 
प्राणी धर्मसमायुक्तो गच्छेत् स्वर्गगतिं पराम्॥ १५॥
तथैवाधर्मसंयुक्तो नरकं चोपपद्यते।
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा ही उत्तम स्वर्ग में जाता है, जबकि अधर्मी नरक में जाता है ॥15 1/2॥
 
Only a righteous person goes to the best heaven, while an unrighteous person goes to hell. ॥15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)