श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  13.116.14-15h 
तैस्तच्छरीरमुत्सृष्टं धर्म एकोऽनुगच्छति॥ १४॥
तस्माद् धर्म: सहायश्च सेवितव्य: सदा नृभि:।
 
 
अनुवाद
वे परिजन शरीर छोड़कर चले जाते हैं, परन्तु धर्म ही उस आत्मा का अनुसरण करता है; अतः धर्म ही सच्चा सहायक है। अतः मनुष्यों को सदैव धर्म का पालन करना चाहिए।
 
Those family members leave the body and go away, but only Dharma follows that soul; hence Dharma is the only true helper. Hence, humans should always follow Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)