श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  13.116.129 
वर्जयन्ति च पापानि जन्मप्रभृति ये नरा:।
अरोगा रूपवन्तस्ते धनिनश्च भवन्त्युत॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
जो लोग जन्म से ही पाप का त्याग कर देते हैं, वे स्वस्थ, सुन्दर और धनवान हो जाते हैं। 129.
 
People who abandon sin from birth become healthy, beautiful and wealthy. 129.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)