श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  13.116.126 
पापानि तु नरा: कृत्वा तिर्यग् जायन्ति भारत।
न चात्मन: प्रमाणं ते धर्मं जानन्ति किंचन॥ १२६॥
 
 
अनुवाद
भारत! पाप करके मनुष्य पशु-पक्षियों की योनि में जन्म लेते हैं। वहाँ उन्हें उस धर्म का ज्ञान नहीं होता जो उनका उद्धार कर सके ॥126॥
 
Bharat! By committing sins, men are born in the womb of animals and birds. There they have no knowledge of the religion that can save them. ॥ 126॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)