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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 125
श्लोक
13.116.125
मत्स्ययोनिमनुप्राप्य मृतो जायति मानुष:।
मानुषत्वमनुप्राप्य क्षीणायुरुपपद्यते॥ १२५॥
अनुवाद
मछली के रूप में जन्म लेकर जब वह मर जाता है, तब पुनः मनुष्य योनि में जन्म लेता है। मनुष्य योनि में आने पर उसकी आयु बहुत कम होती है ॥125॥
After being born as a fish, when it dies, it is again born as a human. After coming to human form, its lifespan is very short.॥ 125॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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