श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  13.116.117 
स्त्रियं हत्वा तु दुर्बुद्धिर्यमस्य विषयं गत:।
बहून् क्लेशान् समासाद्य संसारांश्चैव विंशतिम्॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख मनुष्य स्त्री को मारता है, वह यमराज के लोक में जाता है और नाना प्रकार के क्लेश भोगकर बीस बार दुःखमय योनियों में जन्म लेता है ॥117॥
 
A foolish man who kills a woman, goes to the world of Yamraj and after suffering various kinds of tribulations, takes birth in miserable births twenty times. 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)