श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  13.116.113 
खरो जीवति वर्षे द्वे तत: शस्त्रेण वध्यते।
स मृतो मृगयोनौ तु नित्योद्विग्नोऽभिजायते॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
वह गधे के रूप में दो वर्ष तक जीवित रहता है। फिर उसे किसी शस्त्र से मार दिया जाता है। इस प्रकार मरने के बाद वह हिरण के रूप में जन्म लेता है और शिकारियों के भय से सदैव चिंतित रहता है। 113.
 
As a donkey, he lives for two years. Then he is killed with a weapon. After dying in this manner, he is born in the form of a deer and is always worried due to the fear of predators. 113.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)