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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 112
श्लोक
13.116.112
अशस्त्रं पुरुषं हत्वा सशस्त्र: पुरुषाधम:।
अर्थार्थी यदि वा वैरी स मृतो जायते खर:॥ ११२॥
अनुवाद
जो नीच मनुष्य धन के लोभ या शत्रुता के कारण किसी निहत्थे व्यक्ति को शस्त्र से मार डालता है, वह मृत्यु के बाद गधे के रूप में जन्म लेता है।
A vile man who, out of greed for wealth or enmity, kills an unarmed man with weapons is born as a donkey after his death.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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