श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  13.116.110 
अधर्मस्य क्षयं गत्वा ततो जायति मानुष:।
चोरयित्वा पयश्चापि बलाका सम्प्रजायते॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
फिर उसके पाप नष्ट हो जाने पर वह मनुष्य योनि में जन्म लेता है। दूध चुराने वाली स्त्री बगुला बनती है ॥110॥
 
Then after his sins are destroyed, he is born as a human being. A woman who steals milk becomes a heron. ॥110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)