श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 107-108h
 
 
श्लोक  13.116.107-108h 
वर्णान् हृत्वा तु पुरुषो मृतो जायति बर्हिण:॥ १०७॥
हृत्वा रक्तानि वस्त्राणि जायते जीवजीवक:।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अनेक प्रकार के रंग चुराता है, वह मोर बनता है। जो मनुष्य लाल वस्त्र चुराता है, वह तीतर के रूप में जन्म लेता है।
 
A man who steals many kinds of colours and dies becomes a peacock. A man who steals red clothes is born as a partridge. 107 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)