श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  13.116.102 
अयो हृत्वा तु दुर्बुद्धिर्वायसो जायते नर:।
कांस्यं हृत्वा तु दुर्बुद्धिर्हारितो जायते नर:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख मनुष्य लोहा चुराता है, वह कौआ है। जो मूर्ख मनुष्य पीतल चुराता है, वह हरित नामक पक्षी है। 102.
 
The foolish man who steals iron is a crow. The foolish man who steals bronze is a bird called Harit. 102.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)