vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
»
श्लोक 102
श्लोक
13.116.102
अयो हृत्वा तु दुर्बुद्धिर्वायसो जायते नर:।
कांस्यं हृत्वा तु दुर्बुद्धिर्हारितो जायते नर:॥ १०२॥
अनुवाद
जो मूर्ख मनुष्य लोहा चुराता है, वह कौआ है। जो मूर्ख मनुष्य पीतल चुराता है, वह हरित नामक पक्षी है। 102.
The foolish man who steals iron is a crow. The foolish man who steals bronze is a bird called Harit. 102.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×